गंगा नदी तंत्र (Ganga River System)

दोस्तों, आज की इस पोस्ट में आप जानेंगे गंगा नदी तंत्र (Ganga River System) के बारे में। गंगा नदी तंत्र को समझना किसी भी विद्यार्थी के लिए बहुत ही मुश्किल होता हैं, क्योंकि किसी भी नदी के तंत्र या अपवाह तंत्र के कई पहलू होते हैं,

लेकिन आप बेफिक्र रहिये क्योंकि आज हमने आपके लिए इस आर्टिकल में गंगा नदी तंत्र मानचित्र, गंगा नदी तंत्र PDF, गंगा नदी तंत्र Notes in Hindi, गंगा नदी का महत्व, गंगा नदी कितनी लंबी हैं, गंगा नदी का अपवाह तंत्र क्या हैं तथा गंगा नदी तंत्र का वर्णन कीजिए सबकुछ शामिल कर दिया।

वो भी विल्कुल आसान भाषा में, और हाँ साथ में गंगा की सहायक नदियां कौन सी हैं, दायीं ओर से मिलने वाली गंगा की सहायक नदिया और वायीं ओर से गंगा में मिलने वाली सहायक नदियाँ भी शामिल की हैं। जिसको पढ़कर आप किसी भी परीक्षा के प्रश्न बहुत ही आसानी से हल कर सकते हो।

मैं आपको बता दूँ कि गंगा नदी तंत्र से किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में एक या दो प्रश्न जरूर पूछे जाते हैं वो चाहे UPSC, BANK, RAILWAY, SSC, PO, RO/ARO, VDO कोई भी एग्जाम हो। तो आइये डिटेल में जानते गंगा नदी तंत्र के बारे में।

गंगा नदी तंत्र

Table of Contents

गंगा नदी तंत्र का महत्व

गंगा नदी तंत्र भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण नदी तंत्र हैं। गंगा एक अन्तर्राष्ट्रीय नदी हैं, जो भारत के कई राज्यों से बहती हुई बांग्लादेश में प्रवेश करती हैं और अपना जल बंगाल की खाड़ी गिराती हैं। गंगा नदी बंगाल की खाड़ी में जल गिराने से पहले डेल्टा बनाती हैं।

गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदी हैं। पूर्ण प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के अनुसार गंगा नदी अपनी उद्गम स्थल से लेकर बंगाल की खाड़ी तक प्राचीन काल से वर्तमान तक भारत की सभ्यता की कहानी बयान करती हैं।

वास्तव में गंगा नदी, भारतीय सभ्यता का पर्याय हैं। गंगा नदी का जल उर्वता, पवित्रता और लोगों की आध्यात्मिकता से जुड़ा हुआ हैं।

गंगा नदी भारतीय राज्य उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी में स्थित गोमुख हिमनद (Gaumukh Glacier) से निकलती हैं। गोमुख ग्लेशियर सागर स्तर से लगभग 7010 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हैं। उत्तरकाशी में इस नदी को भागीरथी के नाम से जाना जाता हैं, जो महाखड्ड एवं संकीर्ण घाटियों से गुजर कर दक्षिण की ओर बहती हैं।

देवप्रयाग के स्थान पर भागीरथी का संगम अलकनन्दा से होता हैं, जिसके पश्चात भागीरथी को गंगा के नाम से जाना जाता हैं। लेकिन देवप्रयाग से पहले अलकनन्दा नदी अन्य नदियों के साथ मिलकर पांच प्रयाग बनाती हैं, जिनको पंच प्रयाग कहते हैं।

गंगा नदी के पंच प्रयाग निम्नलिखित हैं

  1. विष्णु प्रयाग (अलकनन्दा नदी एवं धौली गंगा के मिलन से)
  2. नन्द प्रयाग (अलकनन्दा नदी एवं मंदाकनी नदी के मिलन से)
  3. कर्ण प्रयाग (अलकनन्दा नदी एवं पिण्डारी नदी के मिलन से)
  4. रुद् प्रयाग (अलकनन्दा नदी एवं मन्दाकनी नदी के मिलन से)
  5. देवप्रयाग (अलकनन्दा एवं भागीरथी नदी के मिलन से)

गंगा नदी तंत्र (Ganga River System)

  • भारत में सबसे बड़ा नदी तंत्र गंगा नदी तंत्र हैं।
  • भारत में सबसे बड़ा जलगृहण क्षेत्र गंगा नदी का हैं।
  • गंगा नदी दो देशों से होकर बहती हैं, भारत और बांग्लादेश।
  • गंगा नदी की लम्बाई लगभग 2525 कि.मी. हैं।
  • गंगा नदी एक अंतरर्राष्ट्रीय नदी हैं, क्यों ये दो देशों भारत और बांग्लादेश से होकर प्रवाहित होती हैं।
  • गंगा नदी तंत्र का निर्माण दो धाराओं के मिलने से होता हैं। ये दो धाराऐं भागीरथी नदी धारा और अलकनंदा नदी धारा हैं जोकि भारतीय राज्य उत्तराखण्ड से निकलती हैं, और आगे देवप्रयाग में दोनों मिलकर गंगा नदी का रूप ले लेती हैं।
  • भागीरथी नदी उत्तराखण्ड में उत्तरकाशी जिले में गोमुख के निकट गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती हैं और अलकनंदा नदी सतोपथ ग्लेशियर से निकलती हैं।
  • अलकनंदा नदी और भागीरथी दोनों नदियां देवप्रयाग में मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं।
  • अलकनंदा नदी का निर्माण दो धाराओं के मिलने से होता हैं-
    1. धौलीगंगा नदी।
    2. विष्णु गंगा नदी
  • धौलीगंगा नदी और विष्णु गंगा नदी सतोपथ ग्लेशियर (हिमानी) से निकलती हैं। ये दोनों नदियां विष्णु प्रयाग में एक दूसरे से मिल जाती हैं, तो विष्णु प्रयाग में मिलने पर इसे हम अलकनंदा कहते हैं।
  • अलकनंदा नदी से आगे कर्णप्रयाग में पिण्डार नदी आकर मिलती हैं।
  • कर्णप्रयाग से आगे रूद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी से मंदाकिनी नदी मिलती हैं।
  • रूद्रप्रयाग से आगे देवप्रयाग में अलकनंदा नदी से भागीरथी नदी आके मिलती हैं।
  • अंत में, भागीरथी नदी और अलकनंदा नदी की संयुक्त धारा गंगा नदी कहलाती हैं।

गंगा नदी भारत में कितने राज्यों से होकर प्रवाहित होती हैं?

गंगा नदी भारत में पांच राज्यों से होकर प्रवाहित होती हैं, जोकि निम्नलिखित हैं।

  1. उत्तराखण्ड
  2. उत्तर प्रदेश
  3. विहार
  4. झारखण्ड
  5. पश्चिम बंगाल

ये भारत के वो पाँच राज्य हैं जिनसे होकर गंगा नदी प्रवाहित होती हैं। तो आइये इनसे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर भी नजर डालते हैं। जो

  • गंगा नदी की सबसे ज्यादा लम्बाई उत्तर प्रदेश में हैं।
  • गंगा नदी की सबसे कम लम्बाई झारखण्ड में हैं।
  • गंगा नदी सर्वप्रथम हरिद्वार में पर्वतीय भाग से निकलकर मैदान में प्रवेश करती हैं।
  • पश्चिम बंगाल में गंगा नदी हुगली नदी और भागीरथी नदी इन दो वितरिकाओं में बँट जाती हैं।
  • मुख्य नदी जो भागीरथी हैं, वो बांग्लादेश में प्रवेश कर जाती हैं, और हुगली नदी पश्चिम बंगाल में दक्षिण की तरफ प्रवाहित होते हुए बंगाल की खाड़ी में अपना जल गिराती हैं। कोलकाता हुगली नदी के ही तट पर बसा हुआ हैं। कोलकाता भारत का एक प्रमुख और समृद्ध शहर हैं।
  • कोलकाता शहर प्राचीन काल से ही महत्व और समृद्ध शहर माना जाता हैं।
  • छोटा नागपुर पठार के बीचो बीच भ्रंश घाटी में बहने वाली दामोदर नदी पूर्व में बहकर हुगली नदी से मिल जाती हैं।
  • गंगा की मुख्य धारा भागीरथी अर्थात गंगा बांग्लादेश में पहुँचकर पदमा नदी कहलाती हैं।
  • पदमा नदी, ब्रहमपुत्र नदी से मिलती हैं, तो दोनों की संयुक्त धारा पदमा ही कहलाती हैं, आगे चलकर पदमा नदी से बराक नदी/मेघना नदी मिलती हैं, तो दोनों की संयुक्त धारा मेघना नदी कहलाती हैं, अर्थात गंगा का अंतिम नाम मेघना नदी ही हैं। तो मेघना नदी ही अंत में बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
  • तो दोस्तों गंगा नदी जब उत्तराखण्ड से निकलती हैं, तो उसका नाम भागीरथी नदी होता हैं। वहीं गंगा नदी जब बांग्लादेश में आकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, तो इसका नाम मेघना नदी होता हैं।
  • बांग्लादेश में गंगा नदी को जमुना नदी कहते हैं अर्थात पदमा नदी और जमुना नदी की संयुक्त धारा पदमा नदी कहलाती हैं।
  • गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी का डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा हैं। गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टे को सुन्दरवन का डेल्टा भी कहते हैं, क्योंकि यहाँ पर जो जंगल पाया जाता हैं। इसमें सुन्दरी नामक वृक्ष की बहुलता हैं। इसलिए इसे हम सुंदरवन का डेल्टा भी कहते हैं। सुन्दरवन डेल्टा का निर्माण हुगली नदी से लेकर मेघना नदी तक हैं।
  • सुन्दर वन का डेल्टा मैंग्रोव वनों के लिए जाना जाता हैं।

मैंग्रोव वन- सुन्दरवन के डेल्टा क्षेत्र में मुख्य रूप से मैंग्रोवा, कैसुरीना, सुन्दरी नामक वृक्ष पाये जाते हैं। मैंग्रोव वनों की वनस्पतियों की लकड़ियाँ बहुत ही कठोर होती हैं, और उनकी छाल नमकीन होती हैं, क्योंकि यह वनस्पतियों की जड़े डेल्टा क्षेत्र में समुद्र में डूबी हुई होती हैं।

विशेषकर जब समुद्र में ज्वार उठता हैं, तो मैंग्रोव वनस्पतियों का आधा हिस्सा अर्थात उनकी ऊँचाई का आधा हिस्सा समुद्र में डूब जाता हैं। हालांकि जब ज्वार खत्म होता हैं तो फिर से भूमि धीरे-धीरे दिखाई देने लगती हैं।

  • भारत के मैंग्रोव वनों में बंगार टाइगर पाया जाता हैं।
  • बंगाल टाइगर विशेषकर सुन्दर वन अर्थात मैंग्रोव वनों में ही पाया जाता हैं।
  • भारत में मैंग्रोव वनों का सबसे ज्यादा क्षेत्रफल पश्चिम बंगाल में हैं। इसके बाद मैंग्रोव वनों का सबसे ज्यादा क्षेत्रफल गुजरात में हैं। तीसरे स्थान में आंन्ध्रप्रदेश में गोदावरी नदी और कृष्णा नदी के डेल्टा में हैं।

गंगा की सहायक नदियाँ (Ganga ki Sahayak Nadiya)

गंगा की सहायक नदियों को सुविधा की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किया गया हैं-

  1. गंगा के दायें तट पर आकर मिलने वाली सहायक नदियां।
  2. गंगा के बाँये तट पर आकर मिलने वाली सहायक नदियां।

गंगा के दायें तट पर आकर मिलने वाली सहायक नदियां।

  • गंगा के दायें तट पर मुख्य रूप से आकर मिलने वाली नदियां प्रायद्वीपीय पठार की नदियां हैं।
  • गंगा की एकमात्र हिमालयी सहायक नदी यमुना नदी हैं, जोकि उसके दाँये तट पर मिलती हैं।
  • गंगा की शेष जो सहायक नदियां गंगा के दाँये तट पर आकर मिलती है, वो प्रायद्वीपीय भारत के पठार से निकलती हैं।
  • गंगा के दाँये तट पर आकर मिलने वाली नदियों में यमुना नदी, चम्बल नदी, सिंध नदी, वेतवा नदी, केन नदी, सोन नदी, टोन्स नदी प्रमुख हैं। (पश्चिम से पूर्व की ओर)
  • प्रायद्वीपीय भारत के पटार से निकलकर गंगा में मिलने वाली उसकी सहायक नदियों का क्रम इस प्रकार हैं।
    • चम्बल नदी, सिंध नदी, वेतवा नदी, केन नदी, सोन नदी, टोन्स नदी।

यमुना नदी (Yamuna River)

यमुना नदी गंगा की एकमात्र हिमालयी सहायक नदी हैं, जो इसके दाँये तट पर आकर मिलती हैं, क्योंकि गंगा की अन्य हिमालयी सहायक नदियाँ उसके बाँये तट पर आकर मिलती हैं।

  • यमुना नदी गंगा की सबसे लम्बी सहायक नदी हैं।
  • यमुना नदी उत्तराखण्ड में बंदरपुच्छ चोटि पर यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती हैं, और प्रयाग में गंगा से मिल जाती हैं।
  • यमुना नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी गोदावरी नदी से छोटी हैं।
  • यमुना नदी की लम्बाई 1365 किलो मीटर हैं, जबकि गोदावरी नदी की लम्बाई जोकि दक्षिण भारत की सबसे लम्बी नदी हैं, 1460 किलोमीटर हैं।

चम्बल नदी (Chambal River)

चम्बल नदी भी गंगा नदी तंत्र का ही हिस्सा हैं, लेकिन चम्बल नदी अपना जल सीधे गंगा नदी में न गिराकर यमुना नदी में गिराती हैं, अर्थात चम्बल नदी यमुना नदी की सहायक नदी हैं। चम्बल नदी भारतीय राज्य राजस्थान की सबसे बड़ी नदी हैं।

यह नदी मध्य प्रदेश में जानापाव की पहाड़ी से निकलती हैं, और उत्तर प्रदेश में 965 किलो मीटर की दूरी तय करने के बाद यमुना नदी में मिल जाती हैं। चम्बल नदी एक बाराहमासी नदी हैं, अर्तात इसमें साल भर जल की मात्रा भरपूर रहती हैं।

चम्बल नदी, यमुना की सबसे लम्बी सहायक नदी हैं।

सिंध नदी (Sindh River)

सिंध नदी भी गंगा नदी तंत्र का ही हिस्सा हैं, लेकिन यह भी चम्बल नदी की तरह अपना जल सीधे गंगा नदी में न गिराकर पहले यमुना नदी में गिराती हैं, अर्थात सिंध नदी यमुना नदी की सहायक नदी हैं। सिंध नदी की लम्बाई 470 किलो मीटर हैं।

सिंध नदी विदिशा जिले के गांव नैनवास कला में स्थित एक ताल से निकलती हैं, और मध्य प्रदेश में उत्तर पूर्व दिशा की ओर प्रवाहित होती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर जाती हैं, और अंत में यू.पी. में आकर यमुना नदी में मिल जाती हैं।

वेतवा नदी (Betwa River)

वेतवा नदी भी गंगा नदी तंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन यह भी अपना जल सीधे गंगा नदी में न गिराकर पहले यमुना नदी में गिराती हैं। इस तरह से वेतवा नदी भी यमुना नदी की सहायक नदी हैं। वेतवा नदी का उद्गम मध्य प्रदेश में रायसेन ज़िले के कुम्हारागाँव से होता हैं, और यह नदी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों में प्रवाहित होती हैं।

इसकी कुल लम्बाई 480 कि.मी. हैं। इसके ऊपरी भाग में आपको कई झरने देखने को मिलेंगे, लेकिन जब से झाँसी के पास आती हैं तो ये काँप के मैदान में ढल जाती हैं, और धीरे धीरे बहले लगती हैं।

वेतवा नदी उत्तर प्रदेश में हमीरपुर के पास यमुना नदी में मिल जाती हैं।

केन नदी (Cane River)

केन नदी की लम्बाई 427 किलो मीटर हैं। यह नदी भी गंगा नदी तंत्र का हिस्सा हैं, और यह भी अपना जल यमुना नदी में गिराती हैं। केन नदी मध्य प्रदेश के कटनी जिला में विंध्यांचल पर्वत से निकलकर, बुंदेलखण्ड क्षेत्र से गुजरते हुए उत्तर प्रदेश की तरफ प्रवाहित होती हुई, उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिला के चिल्ला गाँव में यमुना नदी में प्रवेश कर जाती हैं।

उपरोक्त चारों नदियां प्रायद्वीपीय पठार के अन्तर्गत मालवा के पठार से निकलती हैं।

सोन नदी (Son River)

सोन नदी भी गंगा नदी तंत्र का हिस्सा हैं। सोन नदी मध्य प्रदेश की प्रमुख नदी हैं। यह नदी मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में अमरकंटक पहाड़ियों से निकलकर उत्तर प्रदेश और झारखंड राज्यों से होती हुई बिहार के पटना जिले में गंगा नदी में मिल जाती हैं।

इस नदी का नाम सोन नदी इसलिए पड़ा क्योंकि इसका बालू (रेत) पीले रंग का हैं, जो सोने की तरह चमकता हैं। इसलिए इसका नाम सोन नदी पड़ गया। गंगा नदी की तमाम सहायक नदियों में सोन नदी का प्रमुख स्थान आता हैं। इसकी लम्बाई 784 कि.मी. हैं।

टोन्स नदी (Tons River)

टोन्स नदी दो धाराओं से मिलकर बनती हैं, इसकी पहली धारा भारत के उत्तराखण्ड के उत्तर काशी जिले के बंदरपुच्छ पर्वत के स्वर्गारोहिनी ग्लेशियर से निकलने वाली सूपिन नदी तथा दूसरी धारा हिमाचल प्रदेश में डोगर कार से निकलने वाली रूपी नदी से मिलकर बनती है, और अंत में यह यमुना नदी में मिल जाती हैं।

यह नदी उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश में प्रवाहित होती हैं।

  • केवल टोन्स और सोन नदियां प्रायद्वीपीय पठार से निकलकर सीधे गंगा नदी में अपना जल गिराती हैं।
  • टोन्स नदी इलाहाबाद जिले में गंगा नदी से मिलती हैं।
  • सोन नदी मैकाल पहाड़ी पर अमरकण्टक चोटी से निकलकर पटना के पास गंगा नदी से मिलती हैं।

गंगा के बाँये तट पर आकर मिलने वाली सहायक नदियां।

यमुना नदी को छोड़कर गंगा नदी की अन्य हिमालयी सहायक नदियां उसके बाँये तट पर आकर मिलती हैं। जिनका पश्चिम से पूर्व की ओर क्रम इस प्रकार हैं।

राम गंगा नदी, गोमती नदी, घाघरा नदी, गंढक नदी, कोसी नदी, महानंदा नदी,

  • इनमें से रामगंगा, गोमती नदी और घाघरा नदी उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होती हैं।
  • गंढक और कोसी नदियां बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमा पर प्रवाहित होती हैं।
  • गोमती नदी केवल गंगा की एकमात्र सहायक नदी हैं, जोकि हिमालय से न निकलकर मैदानी क्षेत्र से निकलती हैं। गोमती नदी का उद्गम उत्तर प्रदेश में तराईन के मैदान में स्थित फुल्ह झील से होता हैं। यह पीलीभीत जिले में स्थित हैं।
  • लखनऊ और जौनपुर जैसे शहर गोमती नदी के तट पर ही बसे हैं।
  • गंढक नदी को नेपाल में शालिग्राम/नारायणी नदी भी कहते हैं।
  • कोसी नदी जोकि नेपाल से निकलकर बिहार में गंगा नदी से मिलती हैं। इसे हम बिहार का शोक कहते हैं, क्योंकि यह नदी अपना रास्ता बदलने में कुख्यात हैं। कोसी नदी नेपाल हिमालय पर्वत को काटकर बहुत सारे बालू और मिट्टी बहाकर लाती हैं। और बिहार में अपने रास्ते को अवरूद्ध कर देती हैं, तो यह नदी फिर नया रास्ता ढूंढती हैं।
  • इसके चलते बिहार में नये गाँव और नये जिले अचानक से इसकी चपेट में आ जाते हैं।
  • महानंदा नदी गंगा की सबसे पूर्वी या अंतिम सहायक नदी हैं। यह नदी गंगा के बाँयें तट पर मिलने वाली सबसे पूर्वी या अंतिम नदी हैं।
  • महानंदा नदी का उद्गम पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग की पहाड़ियों से होता हैं।
  • घाघरा नदी मानसरोवर झील के पास से निकलती हैं। यह नेपाल और भारत में बहने वाली एक नदी हैं। यह भी गंगा की सहायक नदी हैं। घाघरा पहनने वाला चोला होता हैं। इसलिए इसका नाम घाघरा चोला के नाम पर घाघरा पड़ा।

गंगा नदी तंत्र (Ganga River System) वीडियो

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Conclusion (निष्कर्ष)

तो दोस्तों, गंगा नदी तंत्र (Ganga River System) को समझना सरकारी नौकरी के इच्छक उम्मीदवारों के लिए बहुत ही आवश्यक हैं, क्योंकि ये भारत और बांग्लादेश में लाखों लोगों के लिए सिंचाई, बिजली उत्पादन, परिवहन और सांस्कृतिक महत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आप सभी के लिए गंगा की सहायक नदियों के बारे में सीखना और अध्ययन करना जारी रखें ताकि सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में आपकी सफलता निश्चित हो जायें।

गंगा नदी तंत्र (Gangs River System) FAQs

गंगा नदी तंत्र का अपवाह तंत्र क्या हैं?

अपवाह तंत्र किसी नदी और उसकी सहायक नदी के जलगृहण क्षेत्र को मिलाकर अपवाह तंत्र बनता हैं। यह एक जाल की तरह होता हैं, अर्थात गंगा नदी का अपवाह तंत्र गंगा नदी और उसकी सहायक नदी को मिलाकर बनता हैं।

गंगा नदी और उसकी सहायक नदी 1.5 मिलियन वर्ग किलो मीटर के क्षेत्र को प्रवाहित करती हैं। गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में यमुना, सोन, गंढक, कोसी और ब्रह्मपुत्र नदियाँ शामिल हैं। गंगा नदी अंतत: बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।

गंगा नदी कितनी लंबी हैं?

गंगा नदी भारत और बांग्लादेश में प्रवाहित होती हैं। यह एक अंतरर्राष्ट्रीय नदी हैं। इसकी लम्बाई लगभग 2525 किलो मीटर हैं। गंगा नदी भारत की सबसे लम्बी नदी हैं, और इसका अपवाह तंत्र भी सबसे बड़ा हैं।

गंगा नदी कहाँ कहाँ से होकर गुजरती हैं?

गंगा नदी भारत और बांग्लादेश में बहती हैं। यह भारत में उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों के सहारे प्रवाहित होती हैं औ, अन्तत: बांग्लादेश से होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिर जाती हैं। गंगा नदी की लंबाई लगभग 2,525 किलोमीटर हैं।

विश्व की सबसे बड़ी नदी का नाम क्या हैं?

विश्व की सबसे बड़ी नदी नील नदी हैं। यह अफ्रीका महाद्वीप की नदी हैं। इसकी लम्बाई लगभग 6650 किलो मीटर हैं।

भारत की सबसे लंबी नदी का नाम क्या हैं?

भारत की सबसे लंबी नदी का नाम गंगा नदी हैं। दोस्तों गंगा नदी भारत की सबसे लम्बी नदी हैं, और यह एक अंतरर्राष्ट्रीय नदी हैं। यह भारत के पाँच राज्यों में बहती हैं। यह भारत भारत के उत्तराखण्ड राज्य से निकलती हैं तो यह पंच प्रयाग बनाती हैं।

Final Words

मैं उम्मीद करता हूँ, आपको ये गंगा नदी तंत्र (Ganga River System) से जुड़ा पोस्ट बहुत ज्यादा पसंद आया होगा। अगर आपको भूगोल का गंगा नदी तंत्र (Ganga River System), के बारे में पोस्ट पसंद आया हैं, तो हमें कमेंट करके जरूर बताये ताकि हम आपके लिये और भी अच्छे तरके से नये-नये टॉपिक लेकर आयें।

जिससे आप अपने किसी भी एग्जाम की तैयारी से कर सकें, धन्यवाद

नोट:- सभी प्रश्नों को लिखने और बनाने में पूरी तरह से सावधानी बरती गयी है लेकिन फिर भी किसी भी तरह की त्रुटि या फिर किसी भी तरह की व्याकरण और भाषाई अशुद्धता के लिए हमारी वेबसाइट My Hindi GK पोर्टल और पोर्टल की टीम जिम्मेदार नहीं होगी |

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