भारत का संविधान भाग-1 (संघ और उसका राज्य क्षेत्र)

भारत का संविधान भाग-1
Part I of the Constitution of India (भाग 1)

भारत का संविधान भाग-1 ( संघ और उसका राज्य क्षेत्र)

  • अनुच्छेद – 1,2,3,,4
  • विशेष क्षेत्र जैसे-
  • जम्मू कश्मीर
  • अनुसूची-5 के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र।
  • अनुसूची-6 के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र।
  • विशेष राज्यों के दर्जो का क्या अर्थ होता हैं
  • संघ राज्य का क्या अर्थ हैं इसकी अवधारणा क्या हैं।
  • अनुच्छेद 1 – भारत राज्यों का संघ होगा
  • अनुच्छेज 2 – संसद नये र्जायों की स्थापना कर सकता हैं,
  • अऩुच्छेद 3 – संसद को नये राज्य के निर्माण तथा भारत र्जाय क्षेत्र में परिवर्तन का अधिकार होगा। इसके लिए निम्नलिखित प्रक्रिया हैं।

भारतीय संविधान के विदेशी स्रोत: विश्व की प्रमुख संवैधानिक व्यवस्था से लिए गए प्रमुख उपबन्ध

संसद क्या-क्या कर सकती हैं?

  • अऩुच्छेद 3 – नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन
  • विधमान राज्यों की सीमा में परिवर्तन।
  • कुछ राज्य या संघ राज्य अथवा दोनो की सीमा मे परिवर्तन।
  • किसी क्षेत्र या राज्य की सीमा बढ़ाने।
  • किसी क्षेत्र या राज्य की सीमा घटाने।
  • किसी क्षेत्र या राज्य का नाम बदलने का अधिकार होगा।

ऩए राज्य के निर्माण की प्रक्रिया

  • ऩए राज्य के निर्माण संबंधी संकल्प/प्रस्ताव/विधेयक को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति की पूर्वामुति आवश्यक हैं।
  • क्योंकि राष्ट्रपति संघीय राज्यव्सवस्था का प्रधान होता हैं । इसलिए राज्य के निर्वाचित विधाक भी राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं। अत: राषट्रपति के माध्यम से उन राज्यों की भावना जानने  का प्रयास किया जाता हैं। जिनका क्षेत्र प्रभावित होने वाला हैं। इसलिए पूर्वानुमति आवश्यक हैं। हालंकि राज्यों के परामर्श राष्ट्रपति के ऊपर बाध्यकारी नहीं होते। और न ही संसद के ऊपर बाध्यकारी होते हैं।
  • तत्पश्चात् नये राज्य के निर्माण संबंधी विधेयक को संसद के किसी सदन में प्रस्तुत किया जाता हैं।
  • दोनों सदनों से साधारण बहुमत से पारित होने के पश्चात् यह राष्ट्रपति के पास जाता हैं । जिसने हस्ताक्षर के बाद यह अधिनियम बन जाता हैं।
  • अनुच्छेद 4  के अनुसार नए राज्यों के निर्माण संबंधी विधेयक को संविधान संशोधन विधेयक नहीं माना जायेगा (इसे राज्य पुनर्गठन अधिनियम के नाम से जाना जाता हैं) यहीं कारण हैं कि इसे साधारण बहुमत से पारित किया जाता हैं।

भारत सरकार अधिनियम 1919 के उद्देश्य, गुण और दोष (Government of India Act 1919)

  • 26 अक्टुबर 1947 को जम्मू कश्मीर के तत्कालनी सम्राट हरि सिहं ने अधिग्रहम पत्र पर हस्ताक्षर कर जम्मू कश्मीर राज्य का भारत संघ में विलय करना स्वीकार्य कर लिया ।
  • भारतीय स्वाधीनात अधिनियम 1947 की धारा 7(1) (बी) के अनुसार एक बार ब्रिटिश सर्वोच्चता समाप्त होने के पश्चात् राजे-रजबाड़े भारत अथवा – पाकिस्तान किसी भी डॉमिनियन में शामिल होने के लिए स्वतंत्र होगें। अत: जम्मू कश्मीर के राजा द्रारा अधिग्रहण पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद वह राज्य कानूनी रूप से भारत का हिस्सा बन गया । किन्तु अनुच्छेद 370 के विशेष उपबन्ध के कारण पाकिस्तान इसे नहीं मानता
  • और जम्मू कश्मीर को भारत में मिलाने के कानूनी उपबन्ध को कानूनी झाँसा बताता हैं।
  • अनुच्छेद 370 (1) जम्मू कश्मीर को यह अधिकार प्रदान करती हैं कि ववह अपने लिए पृथक संविधान बना सकता हैं किंतु इसेक अंतर्गत रक्षा, विदेश मामले और संचार विषय भारत रसरकारर के अधीन होंगे।
  • शेख अब्दुल्ला और पंडित नेहरू के जून 1952 के समझौते के अनुसार राष्ट्रपति ने एक आदेश पारित कर जिसे संविधान ( जे और के) आदेश, 1954 कहते हैं। और जिसके द्रारा 14 मई 1954 को राष्ट्रपति ने जम्मू कश्मीर तथा शेष भारत के बीच राष्ट्रयिता के संबंध को परिभाषित करने के लिए अऩुच्छेद 35(क) जोड़ा (वी द0 सिटिजन व चारू अली खन्ना ने इसे सर्वोच्च न्यायालय में  चुनोती दिया हैं) जम्मू कश्मीर की विशेष स्थिति जो केन्द्र और उस राज्य के राजनीति संबंधी को परिभाषित करती हैं, अनुच्छेद 370 के अन्तर्गत वर्णित हैं। इसे भाग-21 जो अल्पकालिक  विशेष व अन्तरकालीन प्रावधान करता हैं, के अन्तर्गत रखा गया हैं।

इस सम्बन्ध में निम्नलिखित बिंदु महत्ववपूर्ण हैं।

  1. भारतीय संविधान जम्मू कश्मीर को ठीक उसी प्रकार से एक अखण्ड भाग मानता हैं(भारत संघ का जैसे की अन्य राज्य हैं।
  2. संविधान के अनुसार 15 अगस्त 1947 को जम्मू कश्मीर के तत्कालीन शासक के अधीन जो भी क्षेत्र थे वे सभी भारत संघ के अगं होगें ( भारत इसी आधार पर पाक अधिकृत कश्मीर को जम्मू कश्मीर का अंग मानता हैं)
  3. पाक अधिकृत के मुख्य क्षेत्र – मुजफ्फरबाद, गिलगिट बालदिस्तान
  4. राज्य को सभी कार्यपालिका और विधायी मामलों में कानून बनानेो का अधिकार है (रक्षा, विदेश मामले , संसार आदि को छोड़कर )
  5. राज्य के नागरिको को दो वर्गों में रखा गया हैं।
    1. पृथ्वी श्रेणी
    2. दितीय श्रेणी के नागरिक
  • (1 मार्च 1947 के बाद जो लोग वर्तमान पाकिस्तानी क्षेत्र से जम्मू कश्मीर आये थे, उनके लिए राज्य में 10 वर्ष का निवास अनिवार्य हैं, तभी वे वहां के नागरिक माने जाते हैं। इस संबंध मे जम्मू कश्मीर में 1911 के बाद कही से भी आये नागरिकों के लिए नागरिक बनने के नियम उदार हैं।)
  • 1965 में जम्मू कश्मीर संविधान संशोधन के द्रारा सदरे रियासत की व्यवस्था बंद कर दी गई औ उसकी जगह राजप्रमुुख  के रूप में गवर्नर नियुक्त होने लगा।( जम्मू कश्मीर के भारत में शामिल होने के बाद शेख मो0 अब्दुल्ला के दबाव में हरि सिंह को गददी त्यागनी पड़ी थी, और उनके पुत्र करण सिंह को सदरे रियासत बना दिया गया था तथा इसे भी 1965 को समाप्त कर दिया गया)
  • मूल रूप से जम्मू कश्मीर विधानमंडल दिसदनीय हैं इसकी विधानसभा में 100 सीटें व विधानपरिषद में 36 सीटे प्रस्तावित थी किंतु 20 वे संविधान संशोधन, 1988 (जम्मू कश्मीर के संविधान में संशोधन) के द्रारा इसमें परिवर्तन करते हुए विधानसभा की सख्या 87 रखी गयी जबकि 24 सीटों को अनिश्चितकाल  के लिए रिक्त धोषित कर दिया गया।

Final Words

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