प्रस्तावना संविधान का भाग हैं या नहीं | Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai?

मेरे प्यारे दोस्तों, अगर आपके Mind में भी यह चल रहा हैं कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का भाग हैं या नहीं (Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai?), तो आप विल्कुल सही आर्टिकल पर आ गये हो।

क्योंकि आज की इस पोस्ट में हम नीचे लिखे गये भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble Of Indian Constitution) से जुड़े सभी प्रश्नों के बारे में डिटेल में जानेंगे।

  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना क्या हैं।
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना किसने लिखी
  • Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना का महत्व।
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना की प्रकृति
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना का वर्णन कीजिए।
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना लिखिए
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना के प्रमुख बिंदुओं का वर्णन कीजिए
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना हिंदी में pdf

मैं उम्मीद करता हूँ कि इन सारे प्रश्नों के जवाब इस पोस्ट के अंत तक आप अच्छे से जान जायेंगे कि क्या प्रस्तावना संविधान का अंग हैं (Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai?), भारतीय संविधान की प्रस्तावना क्या हैं, भारतीय संविधान की विशेषता क्या हैं? आदि। तो आइये एक एक करके इन सभी प्रश्नों सहित Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai के बारे में जानते हैं।

Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai

भारतीय संविधान की प्रस्तावना क्या हैं?

भारतीय संविधान की प्रस्तावना एक पुस्तक के इंटरोडक्शन की तरह है। प्रस्तावना हमें बताती है, कि संविधान क्या है। प्रस्तावना से हमें पता चलता हैं, कि संविधान यह सुनिश्चित करने के लिए है, कि भारत में सभी के साथ उचित व्यवहार किया जाए, और समान अधिकार और अवसर में समानता हों।

इसमें यह भी कहा गया है कि संविधान के द्वारा यह सुनिश्चित किया जायें कि सभी के साथ सम्मान के साथ व्यवहार हो और हमारा देश एकजुट और मजबूत रहे। प्रस्तावना हमें यह भी बताती है कि संविधान हमारे देश का सर्वोच्च कानून है, और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि हमारा देश लोकतांत्रिक तरीके से चले।

कुल मिलाकर, भारतीय संविधान की प्रस्तावना उन मूलभूत मूल्यों और सिद्धांतों को निर्धारित करती है, जो भारत की सरकार और समाज का मार्गदर्शन करें।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना किसने लिखी?

भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान सभा की ड्राफ्ट समिति द्वारा लिखी गई थी, जो भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए जिम्मेदार थी। ड्राफ्ट समिति की अध्यक्षता डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने की थी, और इसमें अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर, गोपालस्वामी अयंगर, एन. गोपालस्वामी अयंगर और महावीर त्यागी जैसे अन्य उल्लेखनीय व्यक्ति भी शामिल थे।

प्रस्तावना को 22 जनवरी, 1950 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और यह भारतीय संविधान का अभिन्न अंग बन गया।

प्रस्तावना संविधान का अंग हैं या नहीं | Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai?

क्या प्रस्तावना संविधान का अंग हैं-

  • 1960 में पश्चिम बंगाल के जल पाई गुढ़ी जिले में स्थित बेरूबारी थाना क्षेत्र का कुछ भाग पाकिस्तान को देने के संबंध में संसद और केन्द्र सरकार के अधिकार के संबंध में तत्कालीन भारतीय राष्ट्रपति ने अनुच्छेद-143 (1) के अन्तर्गत सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श माँगा था, साथ ही उन्होनें प्रस्तावना में वर्णित संप्रभुता के ऊपर इससे पढ़ने वाले प्रभाव के संबंध में भी संप्रभुता के ऊपर इससे पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में भी परामर्श माँगा था।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा-

  • संविधान संशोधन कर इस कार्य के लिए संसद और सरकार को अधिकृत किया जा सकता है, किन्तु उसने यह बात मानने से इंकार कर दिया कि इससे प्रस्तावना में वर्णित संप्रभुता का अतिक्रमण होगा। न्यायालय के अनुसार प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है। यह संविधान निर्माताओं को वृहद दृष्टि प्रदान करने के लिए बनाई गई थी। किन्तु, केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य 1973 के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रस्तावना को भारतीय संविधान का अभिभाज्य अंग मान लिया। जस्टिस सीकरी, जस्टिस शेकट व जस्टिस ग्रोबर सभी ने एक मत से यह स्वीकार किया कि प्रस्तावना न्यायापालिका के लिए मार्ग दर्शक का कार्य करता हैं। अत: इसे मूल संविधान से अलग नहीं रखा जा सकता। भारत संघ बनाम एल आई सी 1995 में भी सर्वोच्च न्यायालय ने प्रस्तावना को संविधान का अंग माना हैं। अत: आज वहीं स्थिति हैं।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना का महत्व।

  • प्रस्तावना उन मूलभूत मूल्यों और सिद्धांतों को रेखांकित करती है जो भारत के शासन का मार्गदर्शन करते हैं
  • यह समग्र रूप से संविधान और राष्ट्र के उद्देश्यों और आकांक्षाओं का स्पष्ट विचार देता है
  • प्रस्तावना भारत के लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत के रूप में कार्य करती है
  • यह एक कानूनी दस्तावेज है, जो संविधान को भूमि के सर्वोच्च कानून के रूप में स्थापित करता है
  • यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से बताता है।
  • यह संविधान की व्याख्या और कार्यान्वयन में सरकार और न्यायपालिका के लिए मार्गदर्शन के स्रोत के रूप में कार्य करता है।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना की प्रकृति।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना की प्रकृति अलग अलग रूप में बताया गया हैं जोकि आपके एग्जाम के लिए बहुत ही उपयोगी हैं:

  • संप्रभु (Sovereign): भारतीय संविधान भारत को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है। जिसका अर्थ यह है कि भारत किसी अन्य देश या प्राधिकरण के नियंत्रण में नहीं है।
  • धर्मनिरपेक्ष (Secular): भारतीय संविधान भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के रूप में स्थापित करता है। जिसका मतलब यह हैं कि, सरकार किसी विशेष धर्म को वरीयता नहीं देगी, और सभी नागरिकों को धार्मिक कार्यों की स्वतंत्रता की गारंटी देती है।
  • लोकतांत्रिक (Democratic): भारतीय संविधान भारत को एक लोकतांत्रिक राज्य के रूप में स्थापित करता है, अर्थात सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है, और उनके प्रति जवाबदेह भी होती है।
  • गणतंत्र (Republic): संविधान भारत को एक गणतंत्र के रूप में स्थापित करता है, अर्थात राज्य का प्रमुख जनता के द्वारा चुना जाता है, गणतंत्र राज्य में किसी विशेष परिवार या वंश द्वारा राज्य के प्रमुख का पद विरासत में नहीं मिलता है। राज्य का प्रमुख हमेशा आम जनता के द्वारा ही चुनकर आता हैं।
  • न्याय (Justice): भारतीय संविधान न्याय की स्थापना करता है, अर्थात सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि नागरिकों को उचित और समान उपचार मिले, किसी के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।
  • स्वतंत्रता (Liberty): भारतीय संविधान सभी को स्वतंत्रता प्रदान कराता हैं, अर्थात सभी नागरिकों को भाषण, अभिव्यक्ति और आंदोलन की स्वतंत्रता का अधिकार है।
  • समानता (Equality): संविधान राज्य में समानता स्थापित करता है, अर्थात सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि नागरिकों को उचित और समान उपचार मिले।
  • भाईचारा (Fraternity): भारतीय संविधान बंधुत्व की स्थापना करता है, अर्थात सरकार व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता को बढ़ावा देता हैं।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना का वर्णन कीजिए?

दोस्तों संविधान की प्रस्तावना भारतीय संविधान की आत्मा हैं। प्रस्तावना में संविधान के जो मूल आदर्श होते हैं, उन्हें प्रस्तावना के द्वारा संविधान में समायोजित किया गया हैं। अर्थात संविधान की प्रस्तावना को पढ़कर ही अंदाजा लगाजा जा सकता हैं, कि आखिर संविधान किस बारे में हैं और कौन से उद्देश्य, सिद्धांत हैं।

संविधान की प्रस्तावना एक तरह से मार्गदर्शक का कार्य करती हैं।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना लिखिए?

हम, भारत के लोग, भारत को एक, संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य] बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को :

सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,

विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म

                            और उपासना की स्वतंत्रता,

                            प्रतिष्ठा और अवसर की समता

प्राप्त कराने के लिए,

तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और

राष्ट्र की एकता और अखंडता]

सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए

दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. (मिती मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, सवंत दो हजार छह विक्रमी) को एततद्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मा समर्पित करते हैं।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना हिंदी में PDF

नीचे आपकी सुविधा के लिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना हिंदी में PDF लिंग दिया गया। जिसपर क्लिक करने से आपके फोन या पीसी में एक पीडीएप फाईल डाउनलोड होगी जिसको आप फ्री में पढ़ सकते हो।

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Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai? FAQs

क्या प्रस्तावना संविधान का अंग है? | Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai

हां, लेकिन पहले कुछ मुकदमों में सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं हैं लेकिन बाद में प्रस्तावना संविधान का एक हिस्सा है ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटमेंट दे दिया। यह एक परिचय का काम करता है, जो संविधान के मुख्य उद्देश्यों और सिद्धांतों को रेखांकित करता है, और भारत के शासन के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में काम करता हैं।

प्रस्तावना का जनक कौन है?

वास्तव में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को “प्रस्तावना का जनक” माना जाता है, क्योंकि वे संविधान सभा की मसौदा समिति के अध्यक्ष थे। यह संविधान सभा, भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए जिम्मेदार थी। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने प्रस्तावना के प्रारूपण और अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत के संविधान में कितने कानून है?

भारत के संविधान में कुल 448 अनुच्छेद हैं। इन सभी अनुच्छेद को 25 भागों और 12 अनुसूचियों में बाँटा गया है, और साथ में नागरिकों के मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों, सरकार की संरचना और शक्तियों, संविधान में संशोधन की प्रक्रिया जैसे विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को भारतीय संविधान में समायोजित किया गया हैं।

संविधान का भाग कितने हैं?

भारतीय संविधान में 22 भाग है, जिसमें 12 अनुसूचियां शामिल हैं। प्रत्येक भाग एक विशिष्ट विषय से संबंधित है और प्रत्येक भाग और अनुसूची नागरिकों और सरकारी संस्थानों के अधिकारों, शक्तियों और जिम्मेदारियों पर विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।

प्रस्तावना का दूसरा नाम क्या है?

दोस्तों प्रस्तावना का कोई दूसरी नाम नहीं हैं, बल्कि इसको इसके पर्यायवाची शब्द हैं, जिनको हम प्रस्तावना के दूसरे नाम कह सकते हैं, जोकि इस प्रकार हैं- जैसे Preamble, परिचय, इंड्रोडक्शन आदि

Final Words-

मैं उम्मीद करता हूँ आपको ये प्रस्तावना संविधान का भाग हैं या नहीं (Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai?) बहुत ज्यादा पसंद आया होगा। अगर आपको Indian Polity का क्या प्रस्तावना संविधान का अंग हैं या नहीं (Kya Prastavna Samvidhan Ka Bhag Hai?), पोस्ट पसंद आया हैं तो हमें कमेंट करके जरूर बताये ताकि हम आपके लिये और भी अच्छे तरीके से नये नये टॉपिक लेकर आयें। जिससे आप अपने किसी भी एग्जाम की तैयारी अच्छे से कर सकें। धन्यवाद

नोट:- सभी प्रश्नों को लिखने और बनाने में पूरी तरह से सावधानी बरती गयी है लेकिन फिर भी किसी भी तरह की त्रुटि या फिर किसी भी तरह की व्याकरण और भाषाई अशुद्धता के लिए हमारी वेबसाइट My Hindi GK पोर्टल और पोर्टल की टीम जिम्मेदार नहीं होगी |

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